|
|
|
व्यापक कंप्यूटरीकरण, पासपोर्ट आवेदन संग्रह के विभिन्न माध्यम जैसे पीएसीसी/ डीपीसी/ एसपीसी, नए पासपोर्ट कार्यालय खोलना एवं केंद्रीय पासपोर्ट संगठन के सुधार भी जनता की बढ़ती उम्मीदों एवं पासपोर्ट की माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो रहे थे, इसीलिए पासपोर्ट जारी करने की प्रणाली में आमूल परिवर्तन की आवश्यकता हुई | इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर पासपोर्ट सेवा परियोजना (पीएसपी) की पहचान की गई| पीएसपी का उद्देश्य “नागरिकों को पासपोर्ट सम्बन्धी सेवाएँ पारदर्शी, सुलभ, विश्वसनीय तरीके से और आरामदायक वातावरण में सुव्यवस्थित प्रतिबद्ध प्रक्रियाओं द्वारा, प्रशिक्षित और अभिप्रेरित कार्यबल के द्वारा समय पर देना है"।
पीएसपी को सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) प्रणाली में शुरू किया गया है, जिसमे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस सेवा प्रदान करती है | संप्रभु और प्रत्ययी कार्यों के अधिकार जैसे कि पासपोर्ट को प्रमाणित करना, प्रदान करना, जारी करना / निरस्तीकरण करना एमइए के पास सुरक्षित है | सामरिक नियंत्रण का स्वामित्व जिसमे डाटा/जानकारी भी निहित है, का अधिकार मंत्रालय के पास है।
|
पासपोर्ट से संबंधित सेवाओं के वितरण के लिए पासपोर्ट सेवा सरल, कुशल और पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाती है। सरकारी अधिकारियों के लिए एक देशव्यापी नेटवर्क बनाने के अतिरिक्त, इसका उद्देश्य आवेदक के विवरणों की वास्तविकता के सत्यापन के लिए राज्य पुलिस के साथ और पासपोर्ट की डिलीवरी के लिए भारतीय डाक के साथ मिलकर कार्य करना भी है । पीएसपी के द्वारा प्राप्त किए गए सेवा परिवर्तन के महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
नेटवर्क में वृद्धि: जैसे कि देश भर में पासपोर्ट सेवा के भाग के रूप में 37 पासपोर्ट कार्यालय, 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) और 16 पासपोर्ट सेवा लघु केन्द्र (पीएसएलके) स्थापित किए जा रहे हैं।
कहीं पर भी किसी भी समय उपलब्धता: नागरिक अपने पासपोर्ट आवेदन जमा कर सकते हैं और अपनी सुविधानुसार पीएसपी पोर्टल (www.passportindia.gov.in) के माध्यम से मुलाक़ात का समय निर्धारित कर सकते हैं। सभी पासपोर्ट संबंधित सेवाओं की विस्तृत और नवीनतम जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होती है। नागरिक निर्धारित मुलाकात के दिन और समय पर पीएसके पर जाकर लंबी लाइनों और असुविधा से बच सकते हैं।
अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी संरचना: पासपोर्ट सेवा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी संरचना द्वारा समर्थित है, जो दुनिया के सर्वोत्तम सुरक्षा उपायों के तुल्य सुरक्षित और सम्पूर्ण पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराता है । आवेदको का फोटोग्राफ और बायोमेट्रिक्स पीएसके आने पर लिया जाता हैं। उनके आवेदन और सहायक दस्तावेज़ डिजिटाइज़ किए जाते हैं और आगे प्रक्रिया के लिए सिस्टम में संग्रहित किए जाते हैं ।
बेहतर सुविधाएं: पीएसके एक विश्वस्तरीय वातावरण प्रदान करता है। प्रत्येक पीएसके में वातानुकूलित आरामदायक प्रतीक्षा कक्ष है, जिसमे सहायक गाइड, सूचना कियोस्क, फोटोकॉपी, खाद्य एवं पेय सुविधाएँ, सार्वजनिक फोन बूथ, शिशु देखभाल, समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ तथा टेलीविजन की सुविधा उपलब्ध है । इलेक्ट्रॉनिक कतार प्रबंधन प्रणाली ‘पहले आएँ और पहले पाएँ' के सिद्धांत से आवेदन की प्रक्रिया को सुनिश्चित करती है।
कॉल सेंटर और सहायता डेस्क: सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे, 17 भारतीय भाषाओं में संचालित बहुभाषी कॉल सेंटर नागरिकों को पासपोर्ट सेवा से संबंधित जानकारी प्रदान करता है और उनके पासपोर्ट आवेदनों की प्रगति की जानकारी प्रदान करता है | ई-मेल आधारित सहायता डेस्क भी पासपोर्ट संबंधित सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराता है ।
पुलिस और भारतीय डाक के साथ समन्वय: पीएसपी नेटवर्क सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को राज्य पुलिस से जोड़ता है। इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवेदक का डाटा पुलिस के पास सत्यापन के लिए भेजा जाता है। पीसपी भारतीय डाक के लिए इंटरफेस भी प्रदान करता है, जिसके द्वारा नागरिकों को पासपोर्ट की डिलीवरी ट्रैक की जा सकती है|
|
पायलट परियोजना बैंगलोर और चंडीगढ़ में क्रमशः मई 2010 और अगस्त 2010 में शुरू की गई थी। जनवरी 2011 में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के तहत तृतीय पक्ष ऑडिट एजेंसी द्वारा परियोजना के मानकीकरण, परीक्षण और गुणवत्ता के प्रमाणीकरण के बाद, पासपोर्ट सेवा परियोजना को देश भर में शुरू करने की मंजूरी मिल गयी। परियोजना के 2011-12 में पूरा होने की उम्मीद है। |
|
|