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विदेश मंत्रालय का कॉन्सुलर, पासपोर्ट एवं वीजा प्रभाग केन्द्रीय पासपोर्ट संगठन (सीपीओ) के द्वारा भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट एवं कॉन्सुलर सेवाएं और विदेश में स्थित भारतीय मिशनों/ पोस्ट की पासपोर्ट, वीजा और कॉन्सुलर शाखाओं के द्वारा विदेशी नागरिकों तथा विदेश में रहने वाले भारतीयों को कॉन्सुलर एवं वीजा सेवाएं प्रदान करता है ।
भारत में, केन्द्रीय पासपोर्ट संगठन के अंतर्गत 38 पासपोर्ट जारीकर्ता प्राधिकारी (पीआईए) - 37 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ)/ पासपोर्ट कार्यालय (पीओ) और मुख्य सचिव अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कार्यालय हैं, जो पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और समय-समय पर यथा संशोधित पासपोर्ट नियमावली, 1980 के उपबंधों के तहत भारत में पासपोर्ट से जुड़े मामलों को देखते हैं । 38 पीआईए के अतिरिक्त 14 पासपोर्ट आवेदन संग्रहण केन्द्र (पीएसीसी) , 495 जिला पासपोर्ट प्रकोष्ठ(डीपीसी) और 1154 स्पीड पोस्ट केन्द्र(एसपीसी) भी हैं, जो आवेदन संग्रहण केन्द्रों के रूप में कार्य करते हैं । इसके अलावा, दुनिया भर में 178 भारतीय मिशनों और पोस्ट के द्वारा पासपोर्ट, वीजा एवं कॉन्सुलर सेवाएं प्रदान करता है ।
सीपीवी विभाग, अतिरिक्त सचिव (सीपीवी) के पर्यवेक्षण के अंतर्गत काम करता है | संयुक्त सचिव (कॉन्सुलर) कॉन्सुलर मामलों के लिए उत्तरदायी हैं | संयुक्त सचिव (पीवी) को वीजा मामले सौपें गये हैं | केंद्रीय पासपोर्ट संगठन जो विदेश मंत्रालय के अंतर्गत है , उसकी अध्यक्षता संयुक्त सचिव (पीएसपी) एवं मुख्य पासपोर्ट अधिकारी करते हैं, जो पासपोर्ट एक्ट 1967 के अंतर्गत अपील प्राधिकारी हैं और वित्तीय शक्तियों 1978 नियम के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख भी हैं |
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| भारत में पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया का इतिहास और पृष्ठभूमि |
प्रथम विश्व युद्ध के पूर्व भारतीय पासपोर्ट जारी किए जाने की कोई प्रथा नहीं थी । युद्ध के दौरान ही भारत सरकार ने वर्ष 1914 में डिफेंस ऑफ इंडिया अधिनियम को अधिनियमित किया और इसके तहत नियम प्रख्यापित किए गए जिनके अंतर्गत विदेश से भारत आने वाले और भारत से विदेश जाने वाले लोगों के लिए पासपोर्ट रखना अनिवार्य बना दिया गया ।
युद्ध की समाप्ति के 6 माह के उपरान्त इस अधिनियम की वैधता अवधि समाप्त हो गई । तथापि, इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि भारतीय प्रथा को ब्रिटिश सम्राज्य के अन्य भागों तथा अन्य देशों के अनुरूप लाने के उद्देश्य से भारत सरकार को इस प्रणाली को पूर्ण रूप में अथवा आंशिक रूप से बनाए रखने के अपने अधिकार को कायम रखना चाहिए ।
अत: भारत सरकार ने भारतीय पासपोर्ट अधिनियम, 1920 का अधिनियमन किया जिसमें पूर्व के अधिकांश उपबंधों को बनाए रखा गया । इस अधिनियम को 'पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनयम, 1920' का नाम दिया गया ।
हालांकि भारत अधिनियम, 1935 पारित किए जाने के बाद भी उत्प्रवासन केंद्रीय विषय बना रहा, परन्तु केंद्र सरकार ने अपनी ओर से पासपोर्ट जारी करने का अधिकार राज्य सरकारों को प्रत्यायोजित कर दिया । इस प्रयोजनार्थ कुछ राज्य सरकारों अर्थात मुंबई, मध्य प्रान्त और बरार, संयुक्त प्रान्त इत्यादि ने अपने नियमित पासपोर्ट कार्यालय खोले, जो उनके गृह विभागों के अधीन कार्य करते थे ।
भारतीय संविधान के तहत पासपोर्ट जारी किए जाने से संबंधित मुद्दे को केंद्रीय विषय बना दिया गया । वर्ष 1954 तक यह कार्य मंत्रालय की ओर से संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता रहा । वर्ष 1954 में ही मुंबई, कोलकत्ता, दिल्ली, चेन्नई और नागपुर में पहले 5 क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना की गई । इसके कारण अलग से एक संगठन की स्थापना किए जाने की आवश्यकता महसूस हुई और इस मंत्रालय के एक अधीनस्थ कार्यालय के रूप में केंद्रीय पासपोर्ट एवं उत्प्रवासन संगठन का सृजन किया गया । 01-04-2012 को केंद्रीय पासपोर्ट संगठन (सीपीओ) ने 2697 अधिकारियों और स्टाफ के सदस्यों के लिए मंजूर दी है |
वर्ष 1966 तक पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को प्रशासनिक अनुदेशों के द्वारा विनियमित किया जाता था । पासपोर्ट जारी किए जाने संबंधी शक्तियों का प्रयोग सरकार द्वारा भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-1, मद संख्या 19 के साथ पठित अनुच्छेद 73 के आधार पर किया जाता था । हालांकि, संसद सत्र के रूप में नहीं था, अत: सरकार ने पासपोर्ट अध्यादेश 1967 प्रख्यापित किया और 6 माह के उपरान्त इसे वर्तमान पासपोर्ट अधिनियम, 1967 से प्रतिस्थापित कर दिया, जो 24 जून, 1967 से प्रवृत्त हुआ। इस अधिनियम में पासपोर्ट (संशोधन) अधिनियम, 1978 (1978 का 31) और 1993 के अधनियम 35 द्वारा संशोधन किया गया ।
पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत केंद्र सरकार को इसके अंतर्गत नियम बनाने का अधिकार है । अत: उसी वर्ष इस प्रकार की पहली नियमावली बनाई गई जिसे पासपोर्ट नियमावली, 1967 कहा गया । इनमें से कुछ नियमों को समय-समय पर संशोधित, संपूरित और रद्द भी किया गया है । इन संशोधनों को समेकित किया गया और पिछली बार इन नियमों को पासपोर्ट नियमावली, 1980 के रूप में जारी किया गया ।
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| 2011 में पासपोर्ट और संबंधित सेवाओं की एक झलक |
| पासपोर्ट जारीकर्ता अधिकारी (पीआईए) |
- मुख्यालय (सीपीवी विभाग) - राजनयिक और सरकारी पासपोर्ट के लिए
- 37 पासपोर्ट कार्यालय (पहले 5 पासपोर्ट कार्यालय (पीओ) 1955 में स्थापित किये गये)
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिव का कार्यालय
- 179 भारतीय मिशन/ पोस्ट
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| प्रशासनिक तंत्र |
- केंद्रीय पासपोर्ट संगठन | विदेश मंत्रालय की एक सहायक कार्यालय के रूप में 1959 में बनाया गया |
- स्वीकृत ढांचा संख्या: 2697 (समूह ए पोस्ट : 223, समूह बी पोस्ट: 1046, समूह सी पोस्ट : 1428)
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| 2011 में जारी किए गए पासपोर्ट और प्रदान की गई संबंधित सेवाएं |
- 37 पीओ और ए और एन : 58.38 लाख
- मुख्यालय: 30,907 (2840 डीआईपी + 28,067 ऑफिस )
- विविध सेवाएँ: 4.68 लाख
- मिशनों/ पोस्ट: 10.27 लाख (जिसमे 1.05 लाख सीआईपीपीएस पर प्रिंट हुए)
- कुल: 73.65 लाख (2000 के बाद तीन गुना वृद्धि हुई है)
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